Welcome back, Story Creator!

Keep writing amazing stories. Your readers are waiting, Creator.

Continue Listening
Chapter 38

Wife With Benefits - Chapter 38

दो चीजें इंसान को हमेशा सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं: एक नफ़रत और एक जलन। मुझे अपने पति से नफ़रत थी, हालाँकि मैं अपनी इस नफ़रत पर कायम नहीं रह पा रही थी। मेरी फीलिंग्स, जो मुझे अंदर से कमज़ोर कर रही थीं, वह नफ़रत को ख़त्म कर रही थीं। और दूसरी चीज़ जलन, जो सिर्फ़ आयरा की वजह से थी और मुझे इसलिए हो रही थी क्योंकि वह मेरे पति की ज़िंदगी में थी जबकि उसे मेरे पति की ज़िंदगी में होने का कोई हक़ नहीं था। यह चीज़ मेरे दिमाग में आ रही थी, जो मैं जानती हूँ गलत है, लेकिन फिर भी मैं खुद पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। ये दोनों चीज़ें ही मेरे पति की तरफ़ मुझे खींच रही थीं, वह भी तब जब मुझे उससे नफ़रत थी और मुझे हमेशा उसे नफ़रत ही करनी चाहिए थी। हर दिन अपनी इस नफ़रत को बढ़ाना चाहिए था।

मैंने रीवा से प्रोग्राम की बुनियादी जानकारी ली ताकि अगर मैं मंच पर जाकर कुछ बोलूँ तो मुझे पता हो कि मुझे क्या बोलना है। सारी जानकारी लेने के बाद मैं मंच की तरफ़ गई और फिर अपने क़दमों को वहाँ मौजूद सीढ़ियों पर चढ़ाते हुए माइक तक पहुँची।

मैंने पूरे कॉन्फ़िडेंस के साथ बोलना शुरू किया, “मैं यहाँ आए सभी मेहमानों का स्वागत करना चाहती हूँ। आप सब ने यहाँ आकर न सिर्फ़ हमारा मान बढ़ाया है, बल्कि उन बच्चों के भविष्य को भी संवारा है, जिसकी मदद आप लोग करने जा रहे हैं। हमें पता है हम लोगों की संख्या काफ़ी कम है, लेकिन बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। हम जितना उन बच्चों के लिए कर सकते हैं, हम उतना करेंगे और हर साल हमारी मदद को लगातार बढाने की घोषणा करेंगे।” इसके बाद मैंने कुछ और मोटिवेशनल बातें कहीं, जैसे कि हम ही इन ग़रीबों का भला करेंगे, हमारे अलावा कौन इन बेसहारा लोगों के बारे में सोचेगा, वग़ैरह, जिस पर लोग बस तालियाँ बजाते जा रहे थे।

शायद कमज़ोर लोगों के लिए ऐसे शब्द लोगों को तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर देते है क्योंकि वे उन लोगों से इन्हीं शब्दों की उम्मीद करते हैं। पूरा भाषण देने के बाद जब मैं मंच से नीचे उतरी, तो मेरे पति के परिवार के लोग आकर मुझसे मिलने लगे। मेरे पति के घरवालों के सामने मेरी अच्छी इमेज थी, मगर शालिनी आंटी मुझे ऐसे देख रही थीं जैसे मैंने उनके घर से उनका सबसे महँगा तोहफ़ा चुरा लिया हो।

वह मेरे पास आई और टोंट वाले अंदाज़ में बोली, “मुझे तो तरस आता है तुम पर, तुम बोलने में भी कितनी अच्छी हो, मगर फिर भी तुम्हारी फ़ूटी किस्मत, जो तुम्हारी ज़िंदगी में यह सब हो रहा है। काश तुम्हारी शादी मेरे बेटे से हुई होती, तो मैं तुम्हें कभी भी खुद से अलग नहीं होने देती और ना ही अपने बेटे को तुम्हें अलग करने देती, चाहे वह किसी भी लड़की से कितना भी प्यार क्यों ना करता हो।”

This chapter is locked

Unlock this chapter with 5 diamonds to continue reading.

Your balance: 0 diamonds
Buy Diamonds
38 / 49
Storymania AI Ready with page context
Context Open the assistant from any page to use that page as context.
AI

Tell me what you are writing. I can help with ideas, outlines, grammar, plot, pacing, and summaries.