Wife With Benefits - Chapter 13
आशीष मेरे पास आया और फिर मिलने के बहाने मेरे गले लग गया। मुझे उसके मुंह से शराब की बदबू आ रही थी। उसके हाथ मेरी पीठ पर ऐसे फिर रहे थे जैसे वह मेरा पति हो। मैंने उसे खुद से अलग करने की कोशिश की, मगर पहली बार में वह अलग नहीं हुआ, जबकि दूसरी बार जोर लगाने की वजह से वह खुद ही पीछे हो गया।
मुझे उस पर गुस्सा आ रहा था। वह मेरे पति के पास गया और उसके कान में जाकर कहा, “भाई, मानना पड़ेगा, तुम्हारी बीवी तो बहुत खूबसूरत है।”
मेरे पति ने यह सुनकर बस एक मुस्कराहट दी। फिर वह दोनों ही यहां से दूर चले गए और मैंने चैन की साँस ली। मैंने ठंडे गिलास का पानी पिया। इस आशीष के साथ मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। ऐसे में जितना मैं आशीष से दूर रहूँ, उतना ही मेरे लिए अच्छा है।
थोड़ी देर बाद मेरा पति आयरा से मिलने के लिए चला गया। जाने से पहले उसने बहाना बना लिया था कि उसे किसी जरूरी मीटिंग की वजह से जाना पड़ रहा है। किसी को भी यह अजीब नहीं लगा, मगर आशीष के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं था। वो मेरे पति को शक की निगाहों से देख रही थी। जब मेरा पति चला गया था, तब उसने शायद उसके जाने के बाद किसी को कॉल भी किया था।
उस कॉल के बाद उसके चेहरे पर एक बुरी मुस्कराहट थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह मन ही मन कह रहा हो, “वाह मेरे भाई! तुमने तो मुझे एक अच्छा-खासा मौका दे दिया, तुम्हारी बीवी के साथ रोमांस करने का।”
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