Wife With Benefits - Chapter 34
उसने मेरे पति से फिर सवाल किया, “बताओ, क्या तुम्हारे माता-पिता इसके लिए तैयार होंगे? अब तो वे मुझे और भी नफरत करने लगेंगे।”
मेरा पति सिर्फ़ उसे घुरता रहा क्योंकि उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था। वे तो पहले से ही आयरा को पसंद नहीं करते थे और अब जब उन्हें पता चलेगा कि वह किसी और के बच्चे की माँ बनने वाली है, तब तो पसंद करने का सवाल ही नहीं उठता।
मेरे पति ने कुछ सोचा और फिर कहा, “हम इसके बारे में बाद में बात करेंगे, अभी तो यहाँ से चलते हैं और घर जाकर थोड़ा आराम करते हैं।”
मगर इस बात से आयरा को तसल्ली नहीं हुई। उसने अपने आँखों के आँसू को साफ़ किया और फिर कहा, “अद्विक, मुझे जाने दो, मुझे जाना ही होगा। यह मेरी किस्मत है और मेरी किस्मत में जो लिखा है, मुझे उसे भोगना होगा। कोई भी किस्मत का रुख नहीं बदल सकता। मुझ पर भरोसा करो, मैं ठीक रहूँगी। मैं वहाँ पर कोई जॉब देख लूँगी और फिर किसी और से शादी करके खुशहाल जिंदगी जीने की कोशिश करूँगी।”
मेरे पति ने उसके हाथों को कसकर पकड़ा, “प्लीज़ आयरा, यह बहकी-बहकी बातें मत करो। आखिर तुम इतनी ज़िद्दी क्यों बन रही हो? तुम्हें पता है ना तुम्हारी माँ बीमार है और तुम्हारा भाई इतना बड़ा नहीं है कि वह उसका इलाज कर पाएगा। तुम पैसे भेजोगी, फिर भी उन्हें तुम्हारी ज़रूरत पड़ेगी ही। तुम यह सब नहीं कर सकती हो, तुम्हें यहीं पर रहना होगा।”
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