Wife With Benefits - Chapter 30
मेरा पति मेरी तरफ़ आते जा रहा था। मैंने अपने कदम पीछे लेना शुरू कर दिए। मेरे एक पैर में पहले से ही चोट लगी हुई थी क्योंकि वहाँ कांच चुभ गया था। मेरे हाथ में भी चोट लगी हुई थी। जब मैं पीछे हुई तो कांच का एक टुकड़ा मेरे दूसरे पैर में भी चुभ गया और वहाँ से भी खून निकलने लगा।
मैं फिर से दर्द से चिल्लाई, लेकिन अब मेरे दर्द को बर्दाश्त करने वाला यहाँ कोई नहीं था। अगर यहाँ कोई था तो मेरा पति, जो शराब के नशे में पागल था और उसके साथ जो भी जो कुछ भी हुआ है, उसका क़सूरवार मुझे समझ रहा था।
वह मेरे पास आया और मेरे दोनों बाज़ुओं को पकड़कर मुझे पीछे दीवार से लगा दिया। वह बोला, “आज की रात तुम हमेशा याद रखोगी...”
मेरी आँखों में आँसू आ गए थे। मैंने उसे हकलाते हुए कहा, “नहीं, प्लीज़, खुद पर कट्रोल करो, हम सुबह बैठकर आराम से इस बारे में बात करेंगे।”
उसने अपना मुँह मोड़ लिया, “और तुम्हें लगता है कि मैं तुमसे कोई बात करूँगा...”
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