Wife With Benefits - Chapter 42
मेरा पति अद्विक, आयरा के साथ कार में था। वह काफी गुस्से में था और उसका यह गुस्सा कार की स्पीड देखकर आसानी से पता लग रहा था। वह काफी तेज कार चला रहा था। आयरा ने उसके हाथ पर हाथ रखा और उसे कहा, “मैं जानती हूं तुम्हें इस वक्त गुस्सा आ रहा है, लेकिन इतनी तेज कार मत चलाओ। यह मत भुलो मैं भी तुम्हारे साथ हूं।”
अद्विक ने यह सुना तो उसने कार की स्पीड धीमी कर दी, फिर धीमी आवाज में बोला, “मुझे माफ़ कर देना, मैं, मुझे समझ में नहीं आ रहा, मुझे इस मौके पर क्या करना चाहिए। मुझे बस इस बात का गुस्सा आ रहा है कि मेरा कज़न ऐसा निकलेगा, वह मेरी वाइफ पर डोरे डालेगा, तुम बताओ क्या यह सही है? क्या किसी का अपने ही भाभी पर लाइन मारना सही है?”
अद्विक को गुस्सा तो आशिका पर आ रहा था मगर यह बात वह आयरा को नहीं कह सकता था, इसलिए उसने आशीष के कंधे पर रखकर अपनी बंदूक चलाई और अपने गुस्से को शांत करने की कोशिश करने लगा।
आयरा ने उसके हाथ को पकड़े रखा था, “मैं तुम्हें पहले ही समझा चुकी हूं, अब अगर तुम तलाक़ लेने जा रहे हो तो तुम्हें इस बात से कोई मतलब नहीं होना चाहिए, वह किसके साथ रह रही है, किसके साथ नहीं। अगर वह तुम्हारा सगा भाई भी होता तब भी तुम्हें दिक्कत नहीं होनी चाहिए थी। तलाक़ के बाद लड़की पूरी तरह से आज़ाद होती है।”
अद्विक इस बात को बिल्कुल भी नहीं मानना चाहता था। आयरा ने अपनी चालों को चलते हुए कहा, “वैसे भी तुम्हें उसे कैरक्टरलेस लड़की के बारे में इतना नहीं सोचना चाहिए, कल तक वह तुम्हारे साथ थी और आज वह तुम्हारे कजिन के साथ है, और जब उसका तुम्हारे कजिन से मन भर जाएगा तब देख लेना वह किसी और के साथ होगी।”
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