Wife With Benefits - Chapter 46
एक मशहूर कहावत है। कहते हैं, जब शक की दरार पैदा हो जाती है तब हाथ में पकड़ी हुई सुई भी सामने वाले को तलवार की तरह लगती है। मेरे और अद्विक के साथ भी फिलहाल कुछ ऐसा ही हो रहा था। नहीं, शायद सिर्फ अद्विक के साथ हो रहा था। वो मुझे बार-बार आशीष के साथ देख लेता था और अपने मन में बुरे-बुरे ख्याल पाल लेता था। जब भी उसका मुझसे मिलने का मन किया और उसने हिम्मत करके मुझसे मिलने की सोची, उसे मैं आशीष के साथ दिखी हूँ। और ये चीज़ उसके लिए किसी झटके से कम नहीं।
अगले दिन एक बार फिर से मेरा पति ऑफिस में देरी से पहुँचा। ऑफिस में काम करने वाले लोगों के लिए वो किसी भूत की तरह लगता था। उसके कपड़े भी प्रस किए हुए नहीं होते थे। उसका ऑफिस आने का स्टाइल ऐसे लगता था जैसे किसी पियक्कड़ को दारू पिला दी हो और वह अपने कपड़े भी ठीक से नहा पहन सका हो और ऑफिस में आ गया हो।
ऑफिस में आते ही उसने सबसे पहले अपने लिए कॉफी का ऑर्डर किया।
रीवा कॉफी लेकर आई और साथ में ही उसके हाथ में एक फाइल भी थी। उसने कॉफी और फाइल दोनों को एक साथ टेबल पर रख दिया और फिर वह अद्विक को बोली, “हमारे प्राइवेट डिटेक्टिव ने काफी काम की चीज़ बाहर निकाली है, उसने कहा है, आयरा ने पिछले कुछ महीनों में अपने किसी भी जानने वाले से मुलाकात नहीं की, लेकिन एक शख्स, मिस्टर दिनेश, वो और आयरा 3-4 बार एक होटल में मिले हैं और उस होटल का कमरा बस एक रात के लिए ही बुक किया जाता था।”
अद्विक अभी भी नींद में था, लेकिन ये खबर सुनते ही उसकी नींद उड़ गई। उसने फाइल उठाई और उसे खोल कर देखा तो उसमें कुछ तस्वीरें थी जो सीसीटीवी कैमरा से निकली हुई थी। उसे नहीं पता था उसका रखा हुआ प्राइवेट डिटेक्टिव ये सारी तस्वीर कहां से लेकर आया, लेकिन उसने अच्छा काम किया था।
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