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Chapter 35

Wife With Benefits - Chapter 35

मेरे पति की ज़िन्दगी में जो भी समस्याएँ थीं, उन्हें सुलझाकर मैं अपने घर आ चुकी थी। घर आकर मैंने अपने पिता को सब कुछ बता दिया। मैंने उस रात की बात नहीं बताई, लेकिन बाकी सब अपने पिता से नहीं छुपाया। मैंने उन्हें बताया कि मेरा पति पहले से ही किसी और से प्यार करता है और उसके बिना नहीं रह सकता। चीजें मुझे थोड़ी फिल्मी लग रही थी।

मेरे पिता को मुझ पर कभी यकीन नहीं रहा और वे हमेशा मेरी बातों पर शक करते थे। इस बार भी, जब मैं सब कुछ बता रही थी, उन्हें लग रहा था कि इसमें भी मैंने कोई न कोई खेल किया है। वे मुझे एक चालबाज लड़की समझते थे। लेकिन आखिरकार उनके पास भी कोई दूसरा रास्ता नहीं था, सिवाय मेरी बात मानने के। मैंने उनसे कहा कि यह बात मेरे पति के दादाजी को न बताएँ, क्योंकि अभी तक किसी ने भी यह बात उन्हें बताने का फैसला नहीं किया है, और शायद आगे भी नहीं बताया जाएगा, जब तक कि वे अपनी ज़िन्दगी का वक्त पूरा नहीं कर लेते।

मेरी पूरी बात सुनने के बाद, मेरे पिता, रवि सक्सेना, मेरे पास आए और मेरे कंधे को सहलाते हुए बोले, "क्या तुम्हें लगता है तुमने सही फैसला किया है?"

शायद उन्हें मेरी आँखों में छुपा हुआ दर्द दिख रहा था, जिसे मैं छुपाने की कोशिश कर रही थी, मगर छुपा नहीं पा रही थी। इसी वजह से उन्होंने मुझसे यह सवाल किया।

मैं झिझकते हुए बोली, "हाँ, बिल्कुल मुझे पूरा यकीन है कि मैंने सही किया है। आपको मुझ पर भरोसा रखना चाहिए। मैं इतनी कमज़ोर लड़की नहीं हूँ जो गलत फैसला लेती फिरूँ।" ऐसा लग रहा था जैसे मुझे बोलने में दिक्कत हो रही थी। बोलते वक्त मेरा गला अपने आप ही भारी हो रहा था। अंदर ही अंदर इस रिश्ते से अलग होकर मुझे दुख हो रहा था, वह भी मैं नहीं जानती थी क्यों।

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