Wife With Benefits - Chapter 14
मेरे पति की बुआ के घर मैंने एक बहुत बड़ी आफ़त खड़ी कर दी थी और वह आफ़त आशीष के रूप में थी। उसकी नज़रें मेरे ऊपर ठीक नहीं थीं और अब वह मुझसे दुश्मनी भी पाल बैठा था, जिसका नतीजा अच्छा नहीं रहने वाला था। मगर यह इकलौती मुसीबत नहीं थी जो हमारे ऊपर आने वाली थी, बल्कि मेरा पति भी एक और मुसीबत को तैयार कर रहा था।
वह आयरा से मिलने के लिए अस्पताल गया था। हॉस्पिटल की सारी ज़रूरी फ़ॉर्मेलिटी करने के बाद वह दोनों लंच के लिए बाहर एक रेस्टोरेंट में आ गए थे।
मेरे पति ने आयरा से कहा, “शुक्र है तुम्हारी माँ अब ठीक है, तुम्हें अब खाना खा लेना चाहिए। तुम्हारे भाई ने मुझे बताया तुमने कल से कुछ भी नहीं खाया है।”
यह कहकर उसने खाने में काफी सारी चीज़ें ऑर्डर कर दीं। आयरा ने मेरे पति के दोनों हाथों को अपने हाथों में पकड़ा, “बेबी, तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया, मुझे समझ में नहीं आ रहा तुम्हारा यह एहसान मैं कैसे चुकाऊँगी? मेरे पास कोई भी नौकरी नहीं है। आज तुम्हारे जितने भी रुपये खर्च हुए हैं, मैं एक अच्छी नौकरी लगते ही तुम्हें लौटा दूँगी।”
मेरे पति ने उसके हाथों को कसकर पकड़कर बोला, “मेरे साथ ऐसी बकवास मत करो, मैं तुम्हें कितनी बार कह चुका हूँ मेरे सारे पैसे तुम्हारे ही हैं। तुम्हारी माँ के इलाज के लिए अगर मुझे अपनी सारी ज़मीन ज़ायदाद भी लगानी पड़े तो मैं वह भी लगा दूँगा।”
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