Wife With Benefits - Chapter 15
मुझे शालिनी आंटी के यहाँ आए हुए काफी देर हो गई थी। मेरा पति अभी तक नहीं आया था और इस वक़्त तकरीबन रात के 9:00 बज रहे होंगे। सब लोग कई बार मुझसे आकर पूछ चुके थे कि वह कब आएगा? मेरे पास उन्हें बताने के लिए कुछ भी नहीं था। आखिर मैं क्या बताती? प्रोग्राम में शामिल सारे लोग जा चुके थे, बस मेरे पति के पेरेंट्स ही अब यहां थे।
यह बताती कि वो इस वक़्त अपनी गर्लफ़्रेंड के साथ होगा और ना जाने क्या कुछ कर रहा होगा। क्योंकि मुझे नहीं पता था कि उसने अपनी गर्लफ़्रेंड को सब कुछ बता दिया है और उसके बाद उसे इतना दुःख हुआ कि वह अकेले वक़्त बिताने के लिए काफी दूर चला गया। उसे पार्क में अकेला छोड़ने के बाद वह दुख में दूर चला गया था।
9:00 के करीब मेरा पति वापस आया। कार पार्क करने के बाद दरवाज़ा खोलकर घर के अंदर पहुँचा। हम सब इस वक़्त डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे और अलग-अलग टॉपिक पर बातें कर रहे थे। मैं तो इसमें कुछ भी नहीं बोल रही थी, मगर मेरे पति की बुआ और उनके पेरेंट्स ज़रूर अलग तरह के किस्से सुना रहे थे। वे ग्रैंडफ़ादर की बुराइयाँ कर रहे थे जिन्होंने 13 बच्चे पैदा कर रखे थे।
जैसे ही मेरा पति आया, उसने अपने पेरेंट्स को देखा तो उसका चेहरा पसीने से भर गया। वह काफी देरी से आया था। कोई भी मीटिंग से कभी भी इतनी देर करके नहीं आता है। वह क्या जवाब देगा इसका? उसके पास कुछ भी नहीं था और इसी वजह से वह डरा हुआ था।
आशीष ने जैसे ही मेरे पति की तरफ़ देखा, उसके चेहरे पर स्माइल आ गई। वह सभी का ध्यान मेरे पति की तरफ़ करते हुए बोला, “लो, जिसका इंतज़ार था वह आ गया है! पता नहीं कौन सी मीटिंग करके आया है जो इसे आने में इतनी देर हो गई? संडे की मीटिंग और वह भी लेट नाइट तक...?”
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