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Chapter 17

Wife With Benefits - Chapter 17

मैं अपने ससुराल और अपने पति के बीच में खड़ी थी। मैं अपने पति को बचाने की कोशिश कर रही थी। मैं नहीं जानती थी, मैं सही कर रही हूं या फिर नहीं।

मेरे पति ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे अपनी ओर घुमा लिया, “तुम कुछ मत कहो, यह मेरा मामला है। तुम इसे मुझे सलटने दो। मैं बहुत चुप रह लिया हूं मगर मैं अब चुप नहीं रहूंगा।”

यह कहकर उसने मुझे किनारे कर दिया। अर्चना शेखावत ने गुस्से से कहा, “मुझे तो शर्म आ रही है अब अद्विक तुम पर! तुम्हारी पत्नी ने इस वक्त जो भी कहा है, उससे उसकी इज़्ज़त मेरी आँखों में और भी बढ़ गई है। लेकिन... तुम पता नहीं कब अपनी चीजें समझोगे और कब बड़े होगे...उस लड़की के पास घर चलाने के लिए पैसे नहीं हैं और तुम ही उसका इकलौता सहारा हो... तुम नहीं तो वह नहीं... अगर तुम्हारे पास पैसों के नाम पर कुछ भी नहीं होता, तब वह लड़की खुद ही तुम्हें छोड़कर चली जाती।”

मैंने अपने पति का हाथ पकड़ लिया क्योंकि यह बात उसे गुस्सा दिला रही थी। विजय शेखावत ने अर्चना शेखावत का साथ दिया और कहा, “सही कह रही है तुम्हारी माँ। अरे, वो एक गरीब लड़की है और ग़रीब लड़कियाँ अमीर लोगों के साथ ऐसा ही करती हैं। जब मैं तुम्हारी उम्र में था, तो काफी सारी गरीब लड़कियों के चक्कर में ऐसे ही पड़ गया था और इसका नुकसान मुझे हुआ था। अगर तुम नहीं समझे, तो तुम्हारा भी नुकसान होगा।”

मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि इस तरह का प्रिसेप्शन क्यों दिया जाता है कि एक गरीब लड़की जब किसी अमीर लड़के से प्यार करती है, तो उसका टारगेट उसका पैसा होता है, न कि लड़का। हो सकता है काफी सारी लड़कियाँ ऐसा करें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप लड़कियों को इस मामले में बदनाम करें।

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