Wife With Benefits - Chapter 36
दो दिन बीत चुके थे, मगर मैं घर नहीं लौटी थी। मेरे पति को समझ नहीं आ रहा था कि मैं बिना बताए कैसे चली गई। इन दो दिनों में उसने मुझे कितनी बार फोन किया होगा और कितने मैसेज किए होंगे, मगर उसे कोई जवाब नहीं मिला।
वह सोचने लगा कि आखिर मैं किस वजह से नाराज़ होकर गई? क्या उसकी गर्लफ्रेंड के बच्चे की मां बनने की खबर से? मुझे तो यही लग रहा था, जबकि सच्चाई सिर्फ़ मेरे पति को ही पता थी। वह सोच रहा था कि कैसे मैं पूरी बात जानने के बावजूद उसे छोड़कर जा सकती हूँ।
उसने मेरे घर जाने का फैसला किया, मगर दो बार कार में बैठकर वापस आ गया। क्योंकि उसका अहंकार बीच में आ रहा था। वह कार से यह कहकर निकल आता था कि अगर मैं नाराज़ होकर गई हूँ तो मैं खुद वापस आऊँगी, वह मुझे मनाने नहीं जाएगा। उसे लगता था कि मैं उसे बिना मतलब के गलत समझकर नहीं जा सकती। कुछ दिन मेरे बिना रहेगी और उसे मेरी याद आएगी तो वह अपने आप वापस आ जाएगी।
वह मेरे बिना बिल्कुल भी खुश नहीं था। वह चौबीसों घंटे खुद को अकेला महसूस करता था। रात को उसे नींद नहीं आती थी और वह करवटें बदलता रहता था। सुबह उसका उठने का मन नहीं करता था। ऑफिस जाते समय वह सुस्त रहता था, और ऑफिस जाने के बाद ठीक से काम नहीं कर पा रहा था।
जब वह घर पहुँचता था, तो वह मेरी आवाज़ को मिस करता था, जहाँ मैं उसे कहती थी, "आज तुम ऑफिस से बड़ी जल्दी आ गए?"
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