Wife With Benefits - Chapter 44
मैं काफी देर तक अपनी जगह पर खड़ी रही और सोचती रही, मुझे क्या करना चाहिए? मैंने धीरे से अपने पिता से कहा, “डैड, मुझे नहीं पता था हम इतने गरीब हैं। खैर, अब मुसीबत सर पर आ गई है तो इससे निकलने के बारे में सोचना ही होगा।”
मेरे डैड ने मुझसे पूछा, “और तुम ये कैसे करोगी? संजय शेखावत ने पूरे 200 करोड़ रुपए की मदद की है।”
जैसे ही उन्होंने ये कहा, मैं खांसने लग गई, आखिर इतनी बड़ी मदद। मैंने तुरंत गुस्से से डैड को कहा, “और ऐसी आपने कौन सी डील कर ली थी जो आपको इतना बड़ा नुकसान हो गया? आखिर 200 करोड़ का नुकसान कैसे हो सकता है?”
मेरे पिता बेड पर बैठते हुए बोले, “हमें कुछ सामान यूएसए भिजवाना था, बीमा वाले काफी पैसे मांग रहे थे तो मैंने इस बार बिना बीमा के ही सामान को भिजवा दिया। लेकिन मेरी किस्मत इतनी खराब थी कि जिस जहाज पर सामान जा रहा था, वे रास्ते में ही डूब गया। बीमा नहीं था तो किसी तरह का रिफंड नहीं मिला और उसमें लगभग इतने का ही सामान था। मैंने सामने वाली कंपनी से पहले ही एडवांस ले लिया था। बस यही सब कुछ हुआ।”
ये बात तो सच है कि मेरे पिता बहुत कंजूस हैं और पैसे बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन ऐसे मामले में भी वे ऐसी बेवकूफी करेंगे, मुझे इसका अंदाज़ा नहीं था।
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