Chapter 215
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 215
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“इस बात की कभी हिम्मत भी मत करिएगा – कही ऐसा न हो जाए कि मुझे अपनी मर्यादा की सीमा लांघनी पड़े |” ये बात अरुण ने आकाश का हाथ पकड़ते हुए कहा जो उनके बीच अब आ पहुंचा था| अपना हाथ अरुण