Chapter 20
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 20
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अरुण रोजाना की तरह तैयार होकर दादाजी को लेकर उनके आश्रम के लिए निकलने वाला था| वह सुनश्चित समय पर उनके पास खड़ा था| पर उनको तैयार न पाकर वह घबराकर पूछता है – “क्या हुआ दादाजी – आपकी