Chapter 3
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 3
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सबकी निगाह का दृश्य अब पूरी तरह से बदल चुका था| वह महिला भी मुंह पर हाथ रखे बस अपनी जगह खड़ी स्तब्ध रह गई थी| उसके सामने ही सड़क पर अरुण और नन्हा क्षितिज अपने अपने कान पकड़े उठक बैठक