Chapter 25
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 25
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यहाँ बेबसी, मुफलिसी का आलम हर कोने में छितरा पड़ा था| घनश्याम नगर के अनेकों मजदूरो के घर में से यह एक घर था जहाँ तब से आंख खोले कुबेर पड़ा था| बगल में बच्चे एक थाली भात पर एक साथ बैठ