Chapter 136
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 136
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कुछ मजदूर एक कतार में बैठ गए थे तो कुछ पत्तल बिछाकर उनमे खाना परोस रहे थे| अरुण ये देखकर दंग था कि कितनी एकता थी उनमे| उन्हें ऐसे देखकर कोई भी कह देता कि वे सभी एक ही परिवार से है|