Chapter 137
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 137
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मेंशन लौटकर अरुण और ब्रिज आमने सामने बैठे थे| कुछ देर तक कमरे में ख़ामोशी के बाद ब्रिज ख़ामोशी तोड़ते हुए पूछते है – “अब क्या सोचा है अरुण ? करना क्या है ?” “वैसे आपको क्या लगता है –