Chapter 125
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 125
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बहुत कुछ सिर्फ निगाहों की भाषा से कहा और समझा जा सकता है उसके लिए शब्द जैसे नगण्य होते है| अरुण के लिए वर्तिका की बेचैनी जैसे पुनर्जीवित हो उठी, उसपर उसे घायल देखते तो वह अपना आपा