Chapter 90
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 90
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उतराती दोपहर आखिर शाम का हाथ पकड़कर खीच ही लायी| अरुण भी शाम तक जल्दी वापस आ गया| उसे अब बस भूमि के लौटने का इंतजार था| मंदिर में बाकी की सारी तैयारी हरीमन काका के साथ उजला कर चुकी