Chapter 169
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 169
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राजवीर जैसे ही पोर्च पर कार रोकता है मेनका जोश में उतरती हुई अंदर की ओर भागती है| पर विपरीत दिशा से आती भूमि से वह टकराती टकराती बचती है| भूमि उसे दोनों हाथ से थामती हुई कहती है –