Chapter 159
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 159
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अगले ही पल अपनी बेखुदी का अहसास होते रंजीत अपना हाथ ऊष्मा के हाथ पर से हटा लेता है| अबतक उनके द्वारा छोड़ी गई आइसक्रीम पूरी तरह से पिघल चुकी थी और डिनर टाइम भी खत्म हो चुका था इसका