Chapter 111
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 111
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दोनों एकदूसरे का हाथ पकड़े खड़े थे या यूँ कहे कि एकदूसरे के स्पर्श से अपना होशो हवाश ही खो बैठे थे| अरुण की नज़र एकटक उजला पर ठहरी रह गई थी| क्या था वो अहसास जो सीधा उसके दिल में उतरत