Chapter 45
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 45
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गौरा की आवाज अब तक किरन के पिता तक भी पहुँच चुकी थी, वे भी उसे देखने वही आ गए| किरन के स्नेहपूर्ण स्पर्श से गौरा अब शांत हो गई थी पर अपनी हथेली की मिटी हुई मेहँदी से उसका मन उदास ह