Chapter 121
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 121
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सुबह वापस आकर अरुण जहाँ थका हुआ बिस्तर पर निढाल पड़ा था वही उजला अरुण के बदले व्यवहार पर बेचैन हुई जा रही थी| वह कभी बेचैनी में कमरे में टहलने लगती तो कभी हथेली मसलती देर तक खिड़की प