Chapter 94
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 94
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ये समन्दर का एक सुनसान किनारा था जहाँ किसी भी तरह से लोगों का आना जाना नही था वहां सिर्फ दो साए एकदूसरे पर झुके हुए बैठे थे| वे रेत के सबसे अँधेरे हिस्से में थे जबकि आसमान की बुझती