Chapter 168
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 168
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ये कैसी नियति थी जब उन्हें मिलाना ही नहीं था तो वक़्त ने हमे मिलाया ही क्यों ? न चाहते हुए भी इस जुदाई को उसे सहना था| विवेक मेनका को रात में वापस छोड़ने आया तो मेनका ने उस रूम में र