Chapter 85
बेइंतहा <br> <br>"जुनून इश्क़ का" - Chapter 85
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ये सुबह भी कुछ अलग नही थी उसकी, मानो सुबह का सूरज अंगड़ाई लेकर नही बल्कि रात के आसूं पोछकर उठा हो| एक और दिन को उगते हुए अरुण खिड़की के पार देखता सिगरेट फूंक रहा था| उसका समस्त ध्यान