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Chapter 129

My Toxic Husband - Chapter 129

रात के 2 बज चुके थे, और लिमो के भीतर का माहौल एक अजीब सी खामोशी में डूबा हुआ था। बाहर की दुनिया जैसे इस वक्त उनके लिए रुक सी गई थी। सड़कों पर दूर-दूर तक कोई हलचल नहीं थी, सिर्फ गाड़ियों की बत्तियों की हल्की चमक लिमो की खिड़कियों से अंदर आ रही थी और वही अंदर कार में बैठा हुआ अरमान जो चुप था, अब उसकी नजरें लैपटॉप की स्क्रीन पर टिकी हुई थीं, पर उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था, कुछ ऐसा जो खतरनाक था।

तो वहीं दूसरी ओर, मीन उसके बगल में सीट पर लेटी हुई थी, आंखे बंद कर और नींद में होने के कारण उसकी साड़ी न जाने कब ही उसकी टांगों पर हल्के से सरक कर हट गई थी, और उसके नंगे पैर सीट से थोड़ा बाहर निकल रहे थे। मीन की सांसों की लय में एक मासूमियत और सुकून था, जैसे वो इस शोर-शराबे से दूर कहीं सपनों में खोई हुई हो। उसकी नींद गहरी थी, और वो एक निश्चिंत बच्चे की तरह सो रही थी जिसका सब बर्बाद हो चुका हो।

परंतु वही तभी अरमान की नज़रें जो अब लैपटॉप से हट चुकी थी और उन्होंने जब मीन के नंगे पैरों को ऐसे देखा, तब उसके मन में शरारत की एक लहर दौड़ गई। वो मीन को इस तरह मासूम और बेफिक्र से सोते हुए देखकर खुद को रोक नहीं पाया क्योंकि वो इतना कुछ होने के बाद कैसे उसे छोड़ सकता है और इसलिए फिर उसने धीरे-धीरे अपना लैपटॉप बंद किया और उसकी ओर खिसक कर देखने लगता है उसे। उसके होंठों पर एक शरारती मुस्कान थी, जैसे वो कुछ ऐसा करने वाला था जिससे मीन का चैन टूट जाए और यही करता भी है क्योंकि अब वो मीन के पैर को उठा लेता है और अपनी गोद में रखकर लगता है, उसकी उंगलियों को अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे सहलाने। वो एक अजीब सी हलचल थी और धीरे ही धीरे उसकी उंगलियों का हल्का-सा स्पर्श मीना के पैर के तलवों पर सरकता जा रहा था, जैसे कोई नरम सी हवा उसे छू रही हो और इसीलिए फिर क्या मीन की नींद में हल्की सी हरकत होती है और वो ऊंघ जाती हैं। पर वो अभी तक ही गहरी नींद में थी तो बस वो उठती नही है और थोड़ा सा हिलते हुए शांत पड़ जाती है एक बार फिर से।

लेकिन अरमान इतने पर भी रुकने वाला नहीं था। वो उसे इतने चैन में नही देख सकता था और इसीलिए वो मीन के तलवों को और सेंशुअल तरीके से सहलाना शुरू कर देता है। वो अपनी सख्त उंगलियां से मीन के पैर के अंगूठे पर हल्के-हल्के से दबाव देना शुरू कर देता है और जैसे-जैसे उसका स्पर्श और दबाव गहरा सा होने लगता है, तब मीन की सांसें भी थोड़ा तेज़ हो जाती है और उसके होंठ हल्के से कांप उठते है। वो सपनों में भी महसूस करने लगती है कि कुछ तो हो रहा है, कुछ अलग पर वो आंखे नही खोलती है और वही अब अरमान उसकी तरफ से इतना रूखा सूखा सा रिस्पॉन्स पाकर तो फिर अब उसकी तरफ निहारने लगता है और फिर अगले ही पल अपने होंठों को मीन के तलवे पर रख देता है। अब उसकी गर्म सांस मीन के पैरों को छुने सी लगती है, और वो धीरे से मीन के पैर के अंगूठे पर अपने होंठ रख देता है और उसकी टांग पर हाथ रख हंसने लगता है हल्के से ही। अब उसकी दबी हुई हंसी माहौल में एक नई गर्मी पैदा कर रही थी। वो इस बात का आनंद ले रहा था कि मीन अभी भी नींद में है, और उसे पता भी नहीं कि क्या हो रहा है।

उसके बाद फिर अब अरमान अपने होंठों से मीन के तलवों को चूमना शुरू हो जाता है और वही अब हर बार जब उसका स्पर्श मीन के नर्म तलवों को छूता, तब वो ऊंघते हुए एक गहरी सांसें भरने लगती है और हिल जाती है अपनी जगह पर ये सब यही नही रुकता बल्कि अब अरमान मीन की साड़ी को थोड़ा और ऊपर खींच लेता है जिससे उसकी टांगें और साफ दिखने लगती है और फिर वो मीन की नर्म और कोमल त्वचा को अपनी उंगलियों से छूने लगता हैं। जिससे वही उसकी हर स्पर्श तो बस अब मीन के शरीर में एक हल्की सी सनसनी पैदा करने लगता है और वो तड़प सी जाती है ये जो भी हो रहा है।

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