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Chapter 58

My Toxic Husband - Chapter 58

सुबह के 2 बजे,

2 घंटे, लगभग इतने घंटे बीत चुके थे और राजनंदिनी अब भी वहीं फर्श पर पड़ी हुई थी, बेहोश वाले हाल में। खिड़की खुलने की वजह से पानी का जोरों का बौछार उसे पूरा भिगो रहा था और उसकी ड्रेस भी उसके पूरे जिस्म पर चिपक गई थी, तो बस इसकी वजह से लियो दूसरी तरफ चेहरा करके बैठा हुआ था। वैसे, जब वो गिरी थी तो लियो भी अपनी जगह पर हड़बड़ा गया था और पल भर में ही उसे पुकारने भी लगा था उठने के लिए, पर राजनंदिनी को उसकी कोई आवाज नहीं सुनाई दे रही थी। उसका चेहरा धीरे-धीरे घिर रहा था और साफ-साफ नजर आ रहा था कि वो दर्द में है, बेहोश होने के बाद भी। इधर लियो की निगाह उस पर जाकर टिक गई थी। उसे यूं ही जैसे बहुत बुरा लग रहा हो, पर फिर अचानक से ही छा गया था एक सुकून उसे ऐसे देख कि अच्छा ही हुआ क्योंकि...उसने जो किया है उसके साथ ऐसा ही होना चाहिए, तो बस मन में जो थोड़ी बहुत भावना उठी थी, वो भी चली गई थी और उसने ऐसे ही हाल में बंद कर ली थी अपनी आंखें। लेकिन अभी...इतना समय बीत गया तो बस लियो फ्रस्ट्रेट हुए उसे देख रहा होता है और खोलने की कोशिश करने लगता है अपना हाथ क्योंकि इससे अच्छा मौका उसे वापस नहीं मिल सकता है और खिड़की भी नंदिनी ने खोल रखी है, वरना... इतने दिन से तो बस वो अंधेरे में गुजार रहा था, तो बस इसीलिए वो ऊंघते हुए सोफे पर परेशान होने लगता है, तो वहीं नीचे फर्श पर पड़ी हुई राजनंदिनी, जिसका सर फर्श पर लगा था, वो भड़क रहा होता है। शायद उसे धीरे-धीरे होश आने लगा था, तो इसीलिए इसके सर में दर्द भी और इसी वजह से वो.... जब पानी की बौछार काफी तेजी से उसके चेहरे पर अब पड़ता है, तब वो यूं ही ऊंघने लगती है पर आंखे उसकी नहीं खुलती है। तो वहीं सोफे पर बैठा हुआ लियो......में जैसे फुर्ती सी आ गई थी अब और वो कभी राजनंदिनी को देखता तो कभी अपनी रस्सियों को खोलने में और तभी जैसे उसका दिल धक से कर जाता है और वो झट से ही आगे कर लेता है अपने हाथ खुशी के मारे क्योंकि रस्सी खुल चुकी थी, तो बस वो अब तुरंत ही अपने पैरों को भी रस्सी से आजाद कर लेता है और झटके के मारे ही खड़ा हो जाता है। परंतु "आह" की एक आवाज निकल जाती है उसके मुंह से और वो भींच लेता है अपने जबड़े क्योंकि...अचानक से खड़े होने पर बुरा वाला दर्द हुआ है उसे अपनी कमर पर, वो यू ही सहलाने लगता है। लेकिन फिर पल भर में ही दर्द छोड़ तेजी से ही पहुंच जाता है खिड़की के पास और अपने पीछे फर्श पर पड़ी हुई राजनंदिनी को एक नजर देख... तुरंत ही पैर कर लेता है खिड़की पर एक और जैसे ही चढ़ने लगता है। तभी झट से ही राजनंदिनी....(जिसे होश आ गया था) वो उसे पीछे से पूरा ही कमर से पकड़ कसकर ही जोर से वहां से खिंच देती है, लेकिन पानी गिरा था फर्श पर तो उसका पैर भी फिसल जाता है और वो भी अपना हड़बड़ाए हुए हाल में संतुलन खोते हुए गिरने लगती है लियो को पकड़े हुए ही कि इससे पहले राजनंदिनी का सर फर्श पर बुरी तरह से लगता। तभी लियो झट से ही अपना हाथ उसके सर के नीचे कर देता है और पूरा ही कुचलते हुए हाल में गिर जाता है उसके ऊपर।

जिससे वही राजनंदिनी जो पहले से ही दर्द में थी और उसने सोचा कि इस बार पक्का वो गई... वो अब अपने सर के नीचे कोई भी दर्द न महसूस कर अपनी आंखे खोल लेती है और उसी पल आ जाता है उसके चेहरे के करीब लियो का चेहरा और उसकी हरी आंखे भी जिससे वो उसे काफी ज्यादा ही अलग भावना और इंटेंस वाले हाल में देख रहा होता है तो तो वही राजनंदिनी...उसे अपने इतने करीब देख तो मानो उसकी सांसें तेज सी हो जाती है और वो उसी वक्त अपने जिस्म में महसूस करने लगती है एक अड़चन सी और साथ में उसे उसका मेंबर भी महसूस होता है तो बस वो पल भर में ही.... अब फिर से उसे देख पलट देती है नीचे (क्योंकि लियो उठा ही नही था) और वो खुद उसके ऊपर आकर गन रख देती है उसके मुंह के पास और भड़के हुए हाल में कहती है।

"तुझे क्या लगता है तू यहां से भाग जायेगा (उसके मुंह पर जोर से ही मारकर) जान ले लूंगी तेरी अगर वापस से ही ऐसा कुछ करने का सोचा तूने तो....... "

और ये कह वो तुरंत ही उठ जाती है लियो के ऊपर से और उसे फर्श पर बेहोश हुआ देख......(क्योंकि जब लियो उसके ऊपर गिरा था ना तो उसने अपने जेब से एक पिन निकालकर तुरंत ही उसे चुभा दिया था की वो उसपर अटैक न कर पाए इस पल का मौका उठाकर और जब अब मारी तो वो पूरा ही बेहोश हो गया है।) वो उसे घूरने लगती है और अपने सर को सहलाते हुए ......एक बार फिर से ही लियो को पकड़, घसीटे हुए लाकर बांध देती है वापस से ही पर अब चेयर पर और उसका बेहोशी के मारे लटका हुआ चेहरा पकड़ जहां पर लाल हो चुका था ........वो वहां पर अंगूठे से सहलाने लगती है और फिर झटके से ही उसे छोड़ आकर आधी लेट जाती है सोफे पर और निहारने लगती है भारी हुई अपनी आंखो से ऊपर सीलिंग को और बाहर बारिश अपने वेग में बरसती ही चली जाती है।

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