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Chapter 89

My Toxic Husband - Chapter 89

"बस बहुत हो गया है अब तो, आज दी से जवाब लेकर रहूँगी कि उन्होंने मिस्टर कश्यप को यहाँ क्यों रखा है। हाँ, वो उनके दोस्त नहीं हैं। हो ही नहीं सकते हैं, क्योंकि होते तो दी मुझे पहले ही बताती। बचपन से हमने हर एक बात शेयर की है, तो ये कैसे रह सकता है, पक्का कुछ तो गड़बड़ है..."

और ये कहते हुए नैना (हाँ, वही है) वो तेज़ी से ही भागते हुए दौड़ पड़ती है राजनंदिनी के कमरे की तरफ़, लेकिन जैसे ही डोर पर पहुँचती है, तभी "रेड सायरन" जैसी आवाज़ करते हुए पूरे ही हवेली में एक आवाज़ तेज़-तेज़ से ही गूँजने लगती है और नैना हड़बड़ा जाती है अपनी जगह पर। वो तो अब आँखें फाड़े हुए चारों तरफ़ देखने लगती है, क्योंकि उसे तो पता ही नहीं था कि ऐसा भी कुछ लगा है उसकी हवेली में। लेकिन तभी एक बार और उसको झटका सा लगता है जब बाहर से कुछ गोलियों की आवाज़ आने लगती है और तभी उसे अरमान, पार्थ दोनों ही हॉल में अपनी बंदूकों के साथ भागते हुए नज़र आते हैं, जिससे वही वो तो अब और भी ज़्यादा हैरानी के मारे पूरी की पूरी बुरी तरह से सकपका जाती है, क्योंकि ये सब कुछ ही नया था उसके लिए और इसीलिए वो घबराए हुए हालत में ही डोर को कसकर ही पकड़ लेती है और काँपते हुए ही डोर पर मारते हुए कहती है।

"दी..... दीदी....."

और इसी के साथ खुल जाता है डोर तेज़ी से ही और अंदर से और राजनंदिनी... नैना का हाथ कसकर ही पकड़ खींच लेती है और उसे सीने से लगाकर कहती है।

"मैं...मैं कुछ नहीं होने दूँगी, ठीक है।"

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