My Toxic Husband - Chapter 88
कश्यप मेंशन,
सब लोग अभी डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए डिनर कर रहे थे। पूरे हॉल में शांति फैली हुई थी और स्पून तक की आवाज़ भी नहीं आ रही थी। जिसकी वजह से मीन खाते हुए सबकी तरफ ताकने लगी और फिर दिव्या जी को देखा, जिनका हाथ रुका हुआ था और प्लेट भी थोड़ा आगे खिसका था, जैसे वो अब नहीं खाएंगी। तभी मीन आहिस्ते से अपनी जगह से खड़ी हो गई और पीछे से हाथ डालकर दिव्या जी के गले में कंधे पर चेहरा रख उनके गाल को चूमकर बोली,
"ओह मम्मा..... भैया अपने काम के लिए ही तो गए हैं (पाउट बना)। आप क्यों रोती हैं?"
"मीन (भरी हुई आँखों से🥺), पता नहीं लेकिन दिल नहीं मानता है। आज इतने दिन हो गए और बस एक कॉल के बाद उसका एक भी कॉल नहीं आया..... (अपनी जगह से उठकर) ऐसे कैसे काम कर रहा है कि उसे घर वालों तक की याद नहीं आती..... ठीक है बाकी सब तो नहीं, मुझे तो कर सकता है ना। आने दो, अच्छे से दो-तीन डंडे मारूंगी न तो अकल ठिकाने हो जाएगी।"🥺
और यह कहकर दिव्या जी तुरंत ही अपनी जगह से तेजी से बढ़ जाती हैं और गुस्से में अपने कमरे के अंदर घुस जाती हैं। उन्हें ऐसे जाते देख सारे लोग खड़े हो जाते हैं और तभी जिया कहती है,
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