कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 27
दोपहर के समय घर में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ था। परिवार के सभी सदस्य किसी काम से बाहर गए हुए थे, और इस सूनेपन का फायदा उठाकर कजरी एक बार फिर अपने असली और अलमस्त मिजाज में आ गई थी। उसने बदन से भारी साड़ी और ब्लाउज को उतारकर फेंक दिया था और सिर्फ उसी तंग काली ब्रा और बारीक थ्रोंग में आ गई थी।
वह हाथ में झाड़ू थामे बैठक से लेकर गलियारे तक सफाई कर रही थी, लेकिन उसकी चाल में हमेशा की तरह वही चुलबुलापन और मस्तानी लचक कायम थी।
## पूरे बदन का कामुक नजारा
इस एकांत में कजरी का रूप किसी कयामत से कम नहीं लग रहा था। कपड़े इतने छोटे और तंग थे कि उसके बदन का हर उभार अपनी पूरी कशिश के साथ बाहर झांक रहा था:
* **स्तनों की उघड़ी मस्ती:** आगे से उसकी तंग ब्रा के कप्स इतने छोटे थे कि उसके भारी और गोल-मटोल दूध का अधिकांश गोरा हिस्सा बाहर लटक रहा था। कजरी के खड़े और कड़े हो चुके निप्पल ब्रा के पतले कपड़े को चीरकर बाहर की तरफ साफ दिखाई दे रहे थे, जो जेठ जी के सुबह के मर्दन की गवाही दे रहे थे।
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