कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 18
अगली सुबह की ठंडी और सुहानी धूप खिड़की से छनकर अंदर आ रही थी। कजरी, जो अपनी जीत की थकान उतारकर ताज़ा-दम हो चुकी थी, अपनी उसी लाल ब्रा और पैंटी में सजी, अपनी चुलबुली और अलबेली चाल में घर से बाहर निकली। वह सीधे अपने पड़ोसी अंकल के घर की ओर बढ़ गई।
उसने देखा कि घर का दरवाज़ा आधा खुला था और आंटी घर पर नहीं थीं—शायद वे मंदिर या किसी काम से बाहर गई हुई थीं। कजरी के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान फैल गई। वह दबे पाँव अंदर गई और देखा कि अंकल बेसुध होकर अपने बिस्तर पर सो रहे थे।
## अंकल के बिस्तर पर कजरी का आगमन
कजरी के लिए यह मौका किसी खेल से कम नहीं था। उसने अपनी कमर को लचकाया, अपने गोल-मटोल चूतड़ों को मटकाया और धीरे से अंकल के पास बिस्तर पर जा चढ़ी। वह उनके बिल्कुल करीब जाकर लेट गई।
* **कामुक स्पर्श:** कजरी ने अपने भारी, गदराए हुए स्तनों को अंकल के कंधे और भुजाओं से रगड़ते हुए लेटना शुरू किया। उसकी लाल ब्रा की स्ट्रैप्स उसके गोरे कंधों पर और भी आकर्षक लग रही थीं।
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