कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 23
जेठ जी ने अपने दोनों अंगूठों की पूरी ताकत लगाते हुए कजरी के मांसल चूतड़ों के उस बेहद संवेदनशील हिस्से को चरम सीमा तक खींच दिया। उस ज़बरदस्त खिंचाव और घर्षण के आखिरी दौर में कजरी का पूरा बदन एक बार के लिए पूरी तरह अकड़ गया और उसकी पतली कमर आगे प्लेटफॉर्म की तरफ झुक गई। आखिरकार जेठ जी ने उस रास्ते को पूरी तरह फैलाकर चौड़ा कर दिया, जिससे कजरी के नितंबों के बीच एक गहरा और खुला हुआ उभार साफ़ नजर आने लगा।
अपनी इस कामयाबी और वासना के इस तीखे खेल के पूरा होने पर जेठ जी के चेहरे पर एक गहरी, संतुष्ट और कामुक मुस्कान तैर गई।
## जेठ जी की बेबाक टिप्पणी
कजरी के उस फैले हुए और थ्रोंग से पूरी तरह आज़ाद चूतड़ों को देखते हुए जेठ जी अपनी उत्तेजना भरी हँसी को रोक नहीं पाए। उन्होंने धीरे से अपने अंगूठों को उस गर्म और पसीने से तर छेद से बाहर निकाला और कजरी के कान के पास झुककर दबी ज़बान में हंसते हुए कहा:
> "यार कजरी! तेरे चूतड़ों को तो मैंने पूरी तरह फाड़ कर रख दिया रे बाबा! अब आया असली मज़ा!"
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