कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 25
रात का भोजन तैयार होने के बाद, कजरी ने अपने चुलबुले अंदाज़ में रसोई से गरमा-गरम खाना लाकर डाइनिंग टेबल पर सजाया। पूरे दिन की भागदौड़ और गुप्त अनुभवों के बाद भी उसके चेहरे पर वही पुरानी मस्तानी मुस्कान कायम थी। कजरी की बनाई स्वादिष्ट खुशबू से पूरा घर महक उठा था।
परिवार के सभी सदस्य—अर्जुन, उसकी माँ और बाकी लोग—एक साथ रात का खाना खाने बैठे।
## खाने की मेज़ पर तारीफ़ों का सिलसिला
जैसे ही सबने खाने का पहला निवाला मुँह में डाला, कजरी के हाथों के स्वाद ने सबको अपना दीवाना बना दिया। कजरी अपनी लाल साड़ी का पल्लू संभाले, कमर मटकाती हुई सबको खाना परोस रही थी और सबकी प्रतिक्रिया देख रही थी।
* **अर्जुन की माँ का लाड़:** उन्होंने निवाला खाते ही कजरी की तरफ देखा और कहा, "अरे वाह कजरी! सचमुच तेरे हाथों में तो जादू है रे बाबा। इतना स्वादिष्ट खाना तो मैंने बरसों बाद खाया है।"
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