कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 22
गृह-प्रवेश की शुरुआती उथल-पुथल के बाद, कजरी ने अपने उसी चिरपरिचित, अलमस्त और चुलबुले अंदाज़ में एक-एक कर ससुराल की बाकी सारी रस्में भी पूरी कर लीं। चाहे वह देवर-देवरानी के साथ अंगूठी ढूंढने का खेल हो या जेठानी के साथ घर की रीतियां, कजरी बिना किसी लोक-लाज के अपने उसी खुले रूप में हंसती-खेलती रही। उसके हर झुकाव और मटकती चाल पर घर के पुरुषों की सांसें अटकती रहीं, लेकिन कजरी इन सब बातों से बेफिक्र अपनी धुन में मस्त रही।
आखिरकार, देर रात तक चले इन सभी रीति-रिवाजों और रस्मों का सिलसिला थम गया। पूरे दिन की भागदौड़ और शरीर पर पड़े तीखे अनुभवों के बाद अब कजरी का वह गदराया बदन पूरी तरह से थक चुका था।
## अर्जुन के कमरे में प्रवेश
ससुराल के बड़ों से विदा लेकर कजरी सीधे अपने पति अर्जुन के कमरे की ओर बढ़ गई। कमरा फूलों और महकती हुई मोमबत्तियों से सजा हुआ था। कजरी ने कमरे के भीतर कदम रखा और अपनी बेबाक आदत के अनुसार दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया।
* **थकान का आलम:** कजरी ने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया। उसकी काली ब्रा के भीतर कसे भारी स्तन और थ्रोंग में बंधे विशाल चूतड़ अब आराम चाहते थे।
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