कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 26
रात की उस तूफानी और गुप्त दास्तान के बाद जब अगली सुबह हुई, तो घर में हमेशा की तरह चहल-पहल शुरू हो गई। कजरी रोज़ की तरह तड़के ही उठ गई थी। उसने नहा-धोकर अपनी एक नई चटक रंग की साड़ी पहनी और अपनी उसी अलबेली धुन में पूरे परिवार के लिए चाय और गरमा-गरम नाश्ता बनाने रसोई में आ गई।
भले ही सुबह की ताजगी चारों तरफ थी, लेकिन कजरी के बदन के निचले हिस्से में कल रात जेठ जी के दिए कड़े धक्कों और उस ज़बरदस्त प्रहार की भीनी-भीनी सी कसक अब भी महसूस हो रही थी।
## जेठ जी का आगमन और कजरी का संकोच
कजरी रसोई में प्लेटों में नाश्ता सजा ही रही थी कि तभी जेठ जी अपनी लुंगी संभाले, एक हाथ में अखबार लिए बैठक से होते हुए रसोई की तरफ बढ़े। रात के उस बेहद निजी और तीखे खेल के बाद यह पहली बार था जब दोनों एक-दूसरे के आमने-सामने आ रहे थे।
* **नज़रें मिलना:** जैसे ही जेठ जी रसोई के दरवाज़े पर आकर रुके और उन्होंने कजरी की तरफ देखा, कजरी की नज़रें सीधे उनकी आँखों से टकराईं। जेठ जी की आँखों में कल रात की वही जानी-पहचानी कुटिल और संतुष्ट मुस्कान तैर रही थी।
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