कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 15
तालाब के किनारे हवाओं का रुख और भी तेज़ हो चुका था, और उसी लय में मीट वाले के इस खेल का अंदाज़ भी पूरी तरह बदल गया। अब तक जो अंग अंदर ही अंदर दाएं-बाएं घूम रहा था, वह अब पूरी ताक़त के साथ सीधे और गहरे धक्कों में तब्दील हो चुका था। उसने कजरी के दोबारा लौट आए उन भारी, गोल-मटोल चूतड़ों को अपने दोनों हाथों में कसकर जकड़ लिया और पूरी शिद्दत के साथ ज़ोर-ज़ोर से अंदरूनी वार करने लगा।
हर एक ज़ोरदार और गहरे धक्के के साथ कजरी का पूरा बदन आगे-पीछे थिरक उठता। उसकी लाल ब्रा के भीतर कैद उसके भारी दूध हर झटके के साथ हवा में ज़ोर-ज़ोर से उछल रहे थे।
## कोख की गहराई में उतरती गर्माहट
मीट वाला अब अपने चरम आनंद के बिल्कुल करीब था। उसने एक के बाद एक कई तेज़ और गहरे धक्के लगाए, और आख़िरकार एक लंबी सांस खींचते हुए अपने पूरे वजूद का गर्म और गाढ़ा बीज कजरी की कोख की गहराइयों में बूंद-बूंद करके उतारने लगा।
इस अत्यधिक गर्माहट और पुरुषत्व के सीधे प्रवाह ने कजरी के रोम-रोम को एक बार फिर से झंकृत कर दिया। उसकी कोख में समाता वह अंश उसके पूरे शरीर में एक अजीब सी तृप्ति और सिहरन पैदा कर रहा था।
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