कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 7
## अध्याय १४: तालाब पर नया कौतुक
सुबह की उस शांत बेला में कजरी अभी पानी की लहरों का आनंद ले ही रही थी कि तभी गाँव के कुछ लड़के और मर्द खेतों की तरफ जाने के लिए उसी रास्ते से गुज़रे। तालाब के ठंडे पानी में हलचल और छपाक की आवाज़ सुनकर जैसे ही उन्होंने मुड़कर देखा, उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई और चेहरों पर एक अजीब सी खुशी दौड़ गई।
कजरी बिना किसी हिजाब के, पूरी तरह नंगी होकर पानी में अठखेलियाँ कर रही थी। सुबह की उजली धूप में उसका भीगा हुआ बदन साफ चमक रहा था। वहाँ से गुज़रने वाले लोग अपनी आँखें फाड़े, पलकें झपकाना भूलकर वहीं ठहर गए।
## निशानों पर टिकी नज़रें
उन लोगों की भूखी और हैरान नज़रें कजरी के बदन के एक-एक हिस्से का मुआइना करने लगीं:
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