कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 13
तालाब के ठंडे पानी में मिली उस गहरी तृप्ति और सुस्ती के बाद, कजरी ने अपनी आँखें खोलीं। धूप अब थोड़ी ढल चुकी थी और बदन की थकान पानी की लहरों के साथ बह गई थी। कजरी ने एक ज़ोरदार अंगड़ाई ली, जिससे उसके वे दोबारा लौट आए भारी और रसीले दूध हवा में तन गए।
उसने बिना किसी झिझक के किनारे रखी अपनी वही चटक लाल रंग की ब्रा उठाई और इस बार अपनी भरी-पूरी छाती पर कस ली। नीचे पैंटी चढ़ाई और हमेशा की तरह साड़ी-वाड़ी के झंझट से दूर, केवल ब्रा-पैंटी में अपने उसी अलमस्त और चुलबुले अंदाज़ में आगे बढ़ गई। इस बार उसकी मंज़िल थी गाँव की घनी और ठंडी आम की बगिया।
## बगिया की छांव और कजरी की चाल
भारी दूधों की वापसी ने कजरी के बदन को फिर से एक नया उभार और मादकता दे दी थी। वह अपनी कमर को लचकाती और उन गोल-मटोल चूतड़ों को हवा में मटकाती हुई पगडंडी पर दौड़ने लगी:
* **पेड़ों से अठखेलियाँ:** बगिया में कदम रखते ही आम के घने पेड़ों की छांव ने उसका स्वागत किया। कजरी एक डाल से दूसरी डाल को पकड़कर झूलने लगी।
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