कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 9
अगले दिन की सुबह शिवपालपुर में एक नई ताज़गी लेकर आई। कजरी की नींद बहुत अच्छी और सुकून भरी थी। उठते ही उसने अपना वही चुलबुला अंदाज़ अपनाया और सबसे पहले अपने शरीर को उसी लाल ब्रा और पैंटी के सेट से सजाया, जो उसकी बेबाक शख्सियत को और भी निखार देता था।
सूरज की पहली किरणें अभी घास पर ओस के रूप में चमक ही रही थीं कि कजरी ने घर का काम निबटाकर पास के मैदान की ओर रुख किया, जहाँ गाँव के बच्चों की टोली पहले से ही क्रिकेट खेलने के लिए जुट चुकी थी।
## मैदान में कजरी का जलवा
जैसे ही कजरी मैदान में पहुँची, बच्चों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। "दीदी आ गई! अब टीम बराबर हो जाएगी!" एक बच्चा चिल्लाया। कजरी ने अपने बालों को एक रबड़ बैंड से ऊपर बाँधा, जिससे उसकी गर्दन और ब्रा की पट्टियाँ साफ दिखाई दे रही थीं। उसने अपने कपड़े इस तरह सेट किए थे कि खेल के दौरान उसकी फुर्ती में कोई रुकावट न आए।
* **बल्लेबाज़ी का अंदाज़:** कजरी ने जब हाथ में बल्ला थामा, तो वह किसी पेशेवर खिलाड़ी की तरह पिच पर डट गई। वह शॉट मारते वक्त इतनी फुर्ती से दौड़ती कि उसकी ब्रा की पट्टियाँ और पैंटी के किनारे उसकी गति के साथ हिलते।
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