कजरी की अलमस्त जवानी - Chapter 20
कजरी के मोहल्ले में आज का दिन बेहद चहल-पहल भरा था। शहर से अर्जुन के माता-पिता और उसकी छोटी बहन अपनी गाड़ी से वहां पहुंचे थे। वे किसी काम के सिलसिले में आए थे और रास्ते से गुज़र ही रहे थे कि अचानक पूरे परिवार की नज़रें सड़क के किनारे बने एक चबूतरे पर टिक गईं, जहाँ कजरी हमेशा की तरह लोक-लाज और दुनियादारी से पूरी तरह बेफिक्र अपनी ही अलमस्त धुन में मस्त थी।
कजरी केवल अपनी चमकीली लाल ब्रा और पैंटी पहने हुए, अपने पूरे उघड़े और गदराए बदन के साथ धूप में चमक रही थी। वह अपने घुटनों और हाथों को ज़मीन पर टिकाकर पूरी तरह एक अल्हड़ घोड़ी की मुद्रा में झुकी हुई थी।
## कजरी की अनोखी हरकत और अर्जुन के परिवार की नज़र
कजरी अपनी पतली कमर को नीचे की तरफ लचकाए और अपने दोनों भारी, गोल-मटोल मांसल चूतड़ों को हवा में ऊपर की तरफ ताने हुए ज़ोर-ज़ोर से अपनी चुलबुली आवाज़ में बोल रही थी:
> "कईं... कईं... कईं... कईं... रे बाबा! पकड़ो मुझे...!"
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