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Chapter 74

His scarred beauty - Chapter 74

YUVRAJ POV

" मैं क्यों ऐसा बोलकर आया.... ये मुझे खुद नही पता। नही ..it was totally wrong ..... मुझे ऐसा नही बोलना चाहिए था उसे क्योंकि जाते हुए ही उसे देखकर लग रहा था की वो मेरी बात सुनकर शॉक में आ गई है या मेरी बात से डर गई।

डर हां ......मुझे जानना है की वो इतना डरती क्यों है , जबसे कॉलेज ज्वाइन किया है वो मेरे लिए एक मिस्ट्री सी बन गई है। हालांकि ऐसा नही है की मैं इस तरह के हरकत कर उसका बुरा चाहता हु पर इतने स्टूडेंट्स में वो कुछ अलग है। बहुत ही अलग .... कभी कभी तो मैं खुद कन्फ्यूज हो जाता हु की ये क्या है या ऐसी क्यों है ? ......जब – जब मेरा उससे सामना हुआ है उसकी आंखो में मैने एक डर सा देखा है ? क्या वो मुझसे डरती है या ....कुछ और ही बात है । नही .....वो प्रोफेसर अधिराज के साथ कंफर्टेबल है पर कॉलेज में आसपास बॉयज के रहने से नही । आज भीड़ मे भी वो घबरा गई थी और उस दिन ऑफिस में भी मेरे सवाल करने पर ...तो कही इसका मतलब ये तो नही की वो लडको से डरती है । नही पता .....बहुत उलझा रखा है ....वैसे मैं सोच ही क्यो रहा हू उसके बारे में । मुझे ऐसे नही सोचना चाहिए..... नही मेरी तारा उसके पास है और उसका असर तारा पर भी पड़ सकता हैं। मुझे अब तारा को दूर करना होगा उससे पर .....( आंखे बंद किए ) .तारा नही रह सकती उसके बिना , कितनी ज्यादा अटैच हो गई है वो उससे....ये सब देख पा रहे हैं ( बेड पर लेटकर ) मिस कनक....क्या कर दिया है आपने तारा पर .....

और फ़िर ये ही कहते हुए वो फिर तुरंत ही बेड पर से उठ जाता है और डिनर वो करके आया होता है तो उसे आज कुछ अलग सा ही फील हो रहा था जैसे कि दिल खुश हो गया है खाने से । ऐसा नहीं है की वो रोज खाना नही  खाता पर ....पर उसे आज अच्छा लग रहा है। दिव्या की डेथ के बाद से आज पहली बार उसने किसी और के घर से खाना खाया था वरना वो दोनो मुश्किल से ही कही बाहर जाकर खाते थे क्योंकी दिव्या इतना अच्छा खाना बनाती थी की युवराज को उसने कभी कहा ही नहीं की वो बाहर ले चले " "और ये ही सोचते हुए हर दिन की तरह आज भी उसकी आंखे नम सी हो जाती है । बहुत प्यार करता है युवराज आज भी ... दिव्या से इसीलिए तो उसने अब तक वो हर चीज उसकी संभालकर रखी है । हालांकि सबने कहा था की वो उसी के साथ सब जला दे परंतु युवराज नही माना था और इसलिए अब वो अलमीरा हल्के से खोल एक साइड से और भी खोल लेता है और पल भर में फिर से उसकी आंखें भर जाती है जब वो सामने ( उसकी और दिव्या की शादी की तस्वीर और उसका सारा सामान देखता है ) । आज भी उसने सब वैसा का वैसा ही रखा हुआ था जैसा वो छोड़कर गई थी । परंतु तब ही उसकी नजर एक कागज पर चली जाती है जो दिव्या की साड़ी पर रखा हुआ था । जिसकी वजह से वो उसे देख अब उठा लेता है और जैसे ही देखता है तब ही उसकी आंखे हैरानी के मारे फैल सी जाती है क्योंकि ये वो तस्वीर थी ...जो उसने क्लिक की थी पर गलती से और आज तक उसे नहीं दे पाया जिसकी थी । क्योंकि वो कोई और नहीं बल्कि कनक ही है । जिससे अब युवराज तस्वीर निहारने लगता है और खो सा जाता है उस पल में जब वो असलियत में पहली बार उसे मिली थी । ट्रेन में वो दूसरी बार मिली थी उससे ।

फ्लैशबैक,

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