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Chapter 53

His scarred beauty - Chapter 53

पिछले भाग मे आपने पढ़ा था की जैसे ही अधिराज नीचे आता है वो चांद को देखकर पूछता है कि खाना बना या नही पर चांद तो किताब में बिजी थी । इसीलिए कोई जवाब नही देती है । जिसकी वजह से अधिराज उसकी वो बुक छीन लेता है और जो बुक में लिखा था वो पढ़ने लगता है ।

अब आगे ,

वो बुक की लाइन पढ़ने के बाद से ही पूरे हॉल में सन्नाटा सा फैला हुआ था जैसे भूतिया हवेली में हो । बाहर बारिश भी बरसाना शुरू हो गई थी पर हॉल का सन्नाटा बना हुआ था। जिसकी वजह है से अधिराज ( जिसने वो शब्द पढ़े )वो अब आहिस्ते से ही बुक बंद कर देता है और जैसे ही देखता सामने । उसके चेहरे के भाव एक पल के लिए बदल जाता है क्योंकि ….... क्योंकि हॉल में तो कोई था ही नही बल्कि सोफा इतना ठीक लग रहा था की जैसे पहले भी कोई नही था यहां जिसकी वजह से वो बुक वही रख देता है और बढ़ जाता है किचन की तरफ। और  तभी तपाक से कही से भागती हुई चांदनी हां ( वही जिसकी ये किताब थी और अधिराज जब पढ़ रहा होता है तब रफ्फुचकर हो गई थी ) वो तेजी से ही आ जाती है और अब बुक  छुपाए हुए लेकर जैसे ही पिछे  मुडकर भागने जाती है । तभी हॉल  का फोन बज पड़ता है जिससे वो बेचारी इस ऐसे माहौल में आवाज सुन सकपकका  उठती है और जाकर ही सीधा टकरा जाती है अधिराज से जो कॉफी लेकर फोन उठाने आया होता है । अब दोनो का ही बहुत बुरा वाला टक्कर हुआ था और सबसे बुरा तो ये की अधिराज ने उसे बाहों में कसकर पकड़ा हुआ था अपने ऊपर ऊपर ताकि शायद उसे चोट न लगे और सारा कॉफी उसके शर्ट पर फैला हुआ था ।जिसकी वजह है चांदनी इसी ही हाल में अपने माथे पर मारने लगती है और जैसे ही कुछ बोलने जाती है ।तभी अधिराज उसे झकझोर कर खुद से दुसरी तरफ उलट देता है और काफी ज्यादा ही गुस्सैल भरी नजरों से ( जो काफी तीखी) थी उससे निहारते हुए बढ़ जाता है अपने कमरे की तरफ । जिससे इधर चांदनी अब तो अपना चेहरा शर्म के मारे छुपा लेती है। ( एक तो किताब कि वजह से ,दूसरा ये जबसे मिली है बार – बार अधिराज से हमेशा ही गलत पोजीशन में टकराने में ) जिसकी वजह से उसे सच में खुद ही खुद पर शर्म आने लगती है और इसलिए वो अब जैसे ही स्वयं उठकर किताब उठाने जाती है तभी उसकी नजर खुले पन्ने पर चली जाती है जहां लिखा हुआ था।

" Leave me again and promise I will severely punish you in my bed."

बस आज के लिए इतना हार्ट अटैक काफी था एक नॉर्मल इंसान के लिए ( चांदनी की दिल की आवाज थी ये ) । इसके बाद तो जैसे कायापालट ही हो गई और वो ......वो तो बस सुन्न भरी हालत में अपनी जगह से उठ जाती है और न आव देखती है न ताव उस किताब को सॉरी बोल उठाकर फेंक देती है घर से बाहर और झट से डोर बंद कर भाग जाती है वहां से फ्लैश की स्पीड में क्योकी अब उसकी हिम्मत नही थी और भी ज्यादा तारीफ सहने की ।

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