Welcome back, Story Creator!

Keep writing amazing stories. Your readers are waiting, Creator.

Chapter 47

His scarred beauty - Chapter 47

वो तीनो ही अब कार में होते हैं और जहां अधिराज आगे अकेले बैठा होता है वही कनक और चांदनी पीछे की सीट पर बैठी होती है। अब वो लोग थोड़े मिडल रोड पर होते हैं और तभी से चांदनी बार - बार अधिराज को एक ही सवाल से परेशान कर रही होती है की वो कही क्यों न जाए । वो उसकी नही सुनेगी और इसीलिए अब फिर से कहती है।

"देखिए मैं आपके घर में रेंट पर रहती हूं तो आपको इतना तो पता ही होगा की किसी के पर्सनल मैटर में आपको नही घुसना चाहिए।  सो प्लीज आप बार बार दखलअदाजी या ( मुंह बनाते हुए ) मेरी बाते बिना मेरी परमिशन के न सुने । ये मेरे और आपके दोनो के ही लिए अच्छा होगा "।😑

इतना बोल वो फ्रस्ट्रेट  हुए सीट पर सर टिका लेती है और बंद कर लेती है अपनी आंखे । वही चांदनी की ये बात सुन तो कनक शॉक में पड़ जाती है । उसे तो भरोसा नही हो रहा था की वो ऐसा कुछ बोलेगी वो भी उसे जिसने अपनी ही मर्जी से उन दोनो को ही इस  बार रेंट पे करने के लिए मना कर दिया था । जिसकी वजह से कनक ने उससे बहुत पूछा था की क्यो तो उसने नॉर्मली ही कहा की इस बार जरूरत नही है । पर माना की चांदनी को जॉब चाहिए और इसीलिए इतना परेशान हो रही पर उसे ऐसे नही बोलना चाहिए था । बट अब कह ही दिया है तो कनक ...सामने बिलकुल ही शांति से अधिराज को ड्राइविंग करते देख ...चांदनी ( जो शायद सो गई थी कुछ पल में ही ) उसके सर पर हाथ फेर ...अपनी सीट से संभलते हुए आगे वाली सीट पर आ जाती है और जल्दी से सीट बेल्ट पहनकर कहती है।

" अधिराज जी "।

" हम्मम्म "।

This chapter is locked

Unlock this chapter with 5 diamonds to continue reading.

Your balance: 0 diamonds
Buy Diamonds
47 / 119
Storymania AI Ready with page context
Context Open the assistant from any page to use that page as context.
AI

Tell me what you are writing. I can help with ideas, outlines, grammar, plot, pacing, and summaries.