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Chapter 54

His scarred beauty - Chapter 54

पिछले भाग में हमने पढ़ा था की कनक मिस्टर यादव के ऑफिस में जाती है पर वहां पर उसे कोई नजर ही नही आता है ।लेकिन जब वो इधर उधर देख रही होती है तभी धड़ाक से कर डोर ओपन हो जाता है और कनक हड़बड़ाकर एक वास गिरा देती है और साथ में दीवार पर नाम पर शॉक हो जाती है ।

अब आगे ,

सुबह -सुबह इतनी अच्छी शुरुवात किसी की कैसे हो सकती है। उसका दिमाग पल भर में ही घूम जाता है वो सामने नाम पढ़कर और सबसे ज्यादा तो तब जब उसे महसूस होता है की किसी की तीखी नजर उसे सामने से निहार रही है और पिछे वो वास भी साथ में चकनाचूर चूर हो गया है तो बस वो सुन्न सी हालत में आ जाती है की अब क्या करे । इधर जाए या भाग जाए पर भागे भी कैसे ... क्योंकी डोर पर तो कोई खड़ा है । पर जाना तो था ही इसलिए वो  हिम्मत कर  अपना चेहरा ऊपर लेती है ताकि सॉरी बोलकर चले जाए   पर जब देखती है की डोर पर कोई नही है तो उसके सांस में तो जैसे सांस सी आने लगती है और मौका पाकर जैसे ही भागने जाती है । तभी पीछे से एक भारी और शुष्क सी आवाज उसके कानो में चुभ पड़ती है और कोई कहता है।

" Stop right there..."

बस यही बाकी रह गया था उसकी इतनी अच्छी सुबह में । पल भर में ही उसे घुटन सी महसूस होने लगती है ये आवाज सुनकर पर अब क्या ही कर सकती थी । इसीलिए आहिस्ते से ही मुड़ जाती है और देखती है की सामने एक शख्स बैठा हुआ है चेयर पर । वो ऊपर से नीचे पूरे ही चेक वाले नीले सूट बूट में और एक पैर दूसरे पैर पर किए उसे देख रहा है।

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