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Chapter 59

His scarred beauty - Chapter 59

नोट - ओके एक चीज एक्चुअली हमे न हम कहकर बात करने की आदत है। चांद में तो " मैं " करके लिखो तो चल जाता है पर जब कनक में " मैं से " स्टार्ट करके लिखो न तो बहुत अटपटा लगता है , 🥲क्या करे लखनऊ में हम का प्रभाव ज्यादा है इसीलिए आगे पार्ट से न कनक की लाइन " हम से स्टार्ट होगी " तब हमारी खुद की फीलिंग स्ट्रॉन्ग हो जाएगी । आई होप आप लोग कंफ्यूज नही होंगे ।

अगली सुबह धूप की किरण जो दुसरी विंडो पर से पर्दा हटने की वजह से सीधे ही अंदर कनक के बेड पर आ रही होती है और साथ में कमरे में बहुत उजाला कर रही होती है । उसकी वजह से वो अलसाये हुए उठकर बैठ जाती है निहारने लगती है आस पास और पाती है की अब भी उसका सारा सामान फैला पड़ा है  और म्यूजिक बज रहा । तो  वो आहिस्ते से उठकर धीरे ही धीरे सब कुछ समेटकर अपने बैग में डाल लेती है और सामने का विंडो ओपन कर अंगड़ाई लिए जैसे ही सामने देखती है । तभी उसकी आंखे हैरानी से चौड़ी सी फैल जाती है क्योंकि सामने वाले मैंशन का जो कमरा – जिसमें वो बच्ची दिखी थी कल  । अब वहां सामने बेड पर कोई लिटा हुआ दिखता है जिसने सिर्फ बॉक्सर पहना हुआ था और ब्लैंकेट से वो आधा अधूरा सा ढाका हुआ था। तो इसकी  वजह से कनक तेजी से आवाज कर अपनी विंडो क्लोज कर देती है और बिना कुछ कहे फ्रेश हुए निकल पड़ती है नीचे हॉल में और देखती है की चांदनी – सोफे पर ही ब्लैंकेट में लिपटी सो रही तो वो उसके पास आकर  धीरे – धीरे जगाते हुए कहती है।

" चांद उठो ,कॉलेज नही जाना क्या "?

" अरे भाड़ में जाए वो बॉस " वो नींद में ही बुदबुदाते हुए कहती है।😑

" चांदनी ये क्या बोल रही हो  " कनक  हैरानी से उसे देख कहती है।

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