TOXIC HUKUM'S BIWI - Chapter 35
पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि ईशानी मामा जी के साथ स्टेशन पर आती है और वो उसे 10 मिनिट का आने का बोलकर गए थे । लेकिन अब तक उनका पता ही नहीं था कोई आगे तो वो चल देती है अब आगे,
अब इशानी की सांसे थमी हुई थी और वो अपने बैग को कसकर ही पकड़े हुए चल रही होती है स्टेशन पर । न जाने क्या हाल था पर आज स्टेशन बिलकुल ही खाली नजर आ रहा था । न टीटी वाला दिख रहा था न ही लोग ऐसा लग रहा था कि ट्रेन इस स्टेशन पर रूकती ही नहीं और ये ही सोचते हुए इशानी अपने होंठो को काट लेती है और फिर धीरे ही धीरे वो निकल जाती है गेट से बाहर । लेकिन वो एक कदम आगे बढ़ती , तभी उसके कदम अटक से जाते हैं और उसका पूरा चेहरा हो जाता है लाल डर के मारे क्योंकि सामने ऑटो स्टैंड पर 4 - 5 लड़के बैठे हुए थे और जब इशानी बाहर आई तो सब अब उसकी तरफ देखने लगे है। ये मंजर बहुत डरावना था ईशानी के लिए।
क्योंकि अभी मध्य रात्रि का समय है और इस वक्त ऐसी जगह पर कोई दिख जाए वो भी इतने सारे तो एक लड़की की क्या हालत होती है वो उसको ही पता है। वैसे भी कुछ हो जाए तो समाज कुछ और नहीं बल्कि ये देखता है कि लड़की ने क्या पहना था , ये नहीं की लड़के की क्या नियत थी । लोग उसे नहीं कुछ कहते है । इसीलिए अब उधर खड़े - खड़े ही वो उन लोगों की तरफ देखने लगती है और जब पाती है को वो शराब, सिगरेट सब पी रहे है । तब उसके माथे से पसीना छुटने लगता है और फिर इससे पहले उनमें से कोई उठता ....वो डोर ओपन किए वापस से ही स्टेशन पर आ जाती हैं और बेंच पर अपना सामान रखकर वो लगाने लगती है मामा जी को कॉल । पर 5 - 6 बार भी ट्राय करने के बाद कोई पिक नहीं करता है तब तो उसकी हालत एकदम से ही गड़बड़ा जाती है। लेकिन जब वो देखती है कि अब कोई गेट खोल रहा है और उधर से आ रहा है
। तब तो इशानी अपने सामान को कसकर ही पकड़ एक पिलर के पीछे जाकर छुप जाती है और उसी वक्त हो जाती हैं उसकी सांसे तेज । परंतु वो कुछ समझ पाती । तभी कोई उसका हाथ कसकर ही अपने हाथ में पकड़ लेता है और फिर पल भर में ही उसके हाथ से सामान लिए वो बढ़ जाता है आगे । जिससे वही इशानी जो सदमे में है वो उस वक्त अचानक से हाथ पकड़ने के कारण हड़बड़ा गई थी, वो अब जब चेहरा ऊपर करती है। तब फिर जिस शख्स ने उसका हाथ पकड़ रखा था उसे देख तो उसका मुंह खुला का खुला रह जाता है और वो बस ऐसे ही चलती चली जाती है और जब वो लोग पहुंच जाते हैं,तब फिर वो शख्स इशानी का सामान अब पीछे रख देता है और फिर आकर खड़े हो जाता है वो अब बिल्कुल ही उसके सामने और कहता है ,
" घर चले "।
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