TOXIC HUKUM'S BIWI - Chapter 20
पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि विक्रांत - इशानी को लिए उसके घर की तरफ बढ़ जाता है और आकर खड़े हो जाता है डोर पर । लेकिन वो डोर नॉक कर पाता । तभी उसी वक्त दरवाजा खुद ही एक आवाज के खुल जाता है
अब आगे ,
सामने इशानी की माँ अब दरवाजे पर खड़ी थीं। उनके चेहरे पर एक अजीब-सी कठोरता थी और मुट्ठी कसी थी बहुत ज्यादा ही गुस्से में । साथ में उनकी भी आँखें चौड़ी हो गई थी जैसे कोई भूत देख लिया हो । लेकिन वहां कोई और नहीं बल्कि डोर पर उन्होंने विक्रांत को अपनी बेटी को गोद में उठाए हुए पाया एंड साथ में उनके पीछे, श्रृष्टि भी खड़ी थी । जो देख रही होती है इशानी को काफी ज्यादा गुस्से में। जिसकी वजह से वही इधर सामने खड़ा विक्रांत जो उन दोनो को देख रहा था ।वो अब उनकी नज़रों में झलकते झटके और गुस्से को भांपकर बिना किसी संकोच के इशानी को आए अच्छे से पकड़ लेता है और अपनी भारी आवाज में कहता है
"इनकी की तबियत ठीक नहीं थी, इसलिए मैं इसे घर छोड़ने आया हूँ।"
तो वही विक्रांत का ये बोलना था और उसी वक्त इशानी की मां की आँखें एक पल के लिए इशानी के पीले पड़े चेहरे पर जाकर टिक जाती हैं जहां सच में पता चल रहा था कि वो बहुत बिखर है । परंतु फिर वो उसे नफ़रत से देखने लगती है और तुरंत ही विक्रांत की तरफ निहार एक तेज और कड़वी आवाज में कहती है।
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